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हिंसा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जामिया हिंसा मामले की गूंज अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे से पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने के साथ ही छात्रों के विरूद्ध  कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ ही हिंसा के खिलाफ चेतावनी देते हुए यह भी कहा है कि छात्रों की ओर से किए गए हिंसक प्रदर्शन के बाद कोर्ट स्वत: संज्ञान लेने के लिए बाद नहीं होगी। देश में अशांति व्यवस्था फैलाया जाने पर किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।

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आपको बता दें कि अब तक हिंसा के  पुलिस ने दो मामले दर्ज किए हैं। पहला केस न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में और दूसरा केस जामिया नगर थाने में दर्ज किया गया है। पुलिस ने आगजनी, दंगा फैलाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का केस दर्ज किया है। हालांकि, अभी ये साफ नहीं है कि केस किसके खिलाफ दर्ज किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा कि अगर दिल्ली और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों पर पुलिस की बर्बरता पर सुनवाई चाहते हैं तो पहले हिंसा,आगजनी और सरकारी संपत्ति के नुकसान पर रोक लगनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि हम अधिकारों को अवश्य सुनिश्चित करेंगे, लेकिन ऐसे माहौल में नहीं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है परंतु शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में हिंसा फैलाने वाले अराजक तत्वों को इन अधिकारों का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं है।

आपको बता दें कि रविवार को नागरिकता (संशोधन) कानून का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की जामिया मिल्लिया इस्लामिया के समीप न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में पुलिस के साथ झड़प हो गई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने डीटीसी की चार बसों और दो पुलिस वाहनों में आग लगा दी। झड़प में छात्रों, पुलिसकर्मियों और दमकलकर्मी समेत करीब 60 लोग घायल हो गए। पुलिस ने हिंसक भीड़ को खदेडने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े लेकिन उन पर गोलियां चलाने की बात से इनकार किया है।

 

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